1950 का दशक। कलकत्ता (अब कोलकाता) की एक विज्ञापन एजेंसी में काम करने वाला शांत युवक ने अपने मन में एक असंभव-सा सपना पाल लिया था। यह सपना था, फिल्म बनाने का, जो उस दौर में दिन में सपना देखने जैसा था।
यह युवक कोई और नहीं, बल्कि भारत के महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे थे। 2 मई 1921 को कोलकाता में जन्म लेने वाले सत्यजीत रे के पास पहली फिल्म बनाने के लिए न तो धन था और न ही अनुभव। फिर भी उनके दिल में एक कहानी धड़क रही थी, ‘पथेर पंचाली’ (पाथेर पांचाली भी प्रचलित) की।
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