Category: Miscellaneous

Posts not fitting other categories

  • कर्नाटक की पहली महिला मूर्तिकार कनक मूर्ति : जिन्होंने पत्थरों को बोलना सिखा दिया

    कर्नाटक की पहली महिला मूर्तिकार कनक मूर्ति : जिन्होंने पत्थरों को बोलना सिखा दिया

    बनासवाड़ी मंदिर में 11 फुट ऊंची हनुमान की मूर्ति, व्हाइटफील्ड के साईं बाबा हॉस्पिटल में मनमोहक गणेश की मूर्ति, लालबाग वेस्ट गेट पर कुवेम्पु की मूर्ति, और विश्वेश्वरैया इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम में राइट ब्रदर्स की मूर्तियां, ये सभी कर्नाटक की पहली महिला मूर्तिकार, कनक मूर्ति की बनाई हुई हैं। लेकिन वह इन अमिट कलाकृतियों के पीछे की अमर कलाकार कैसे बनीं?

    कनक मूर्ति अपने पति नारायण मूर्ति के साथ
    सोर्स : द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
    और पढ़ें
  • ‘लघु संविधान’ : संविधान दिवस पर भारतीय संविधान के विवादास्पद संशोधन पर एक नजर

    ‘लघु संविधान’ : संविधान दिवस पर भारतीय संविधान के विवादास्पद संशोधन पर एक नजर

    भारत के संविधान संशोधनों के लंबे इतिहास में, जिसमें कुल 106 संशोधन हुए, 1976 का 42वां संशोधन सबसे विवादास्पद रहा। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आपातकाल के दौरान पारित यह संशोधन इतना व्यापक था कि इसे ‘लघु संविधान’ का उपनाम दिया गया।

    इस संविधान दिवस (26 नवंबर) पर, हम आपको भारतीय संविधान के सबसे विवादास्पद संशोधनों में से एक, 42वें संशोधन की याद दिलाते हैं, जिसने संवैधानिक प्राधिकारियों (यानी वे संस्थाएं या पद, जिन्हें भारतीय संविधान द्वारा स्थापित किया गया है, जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद, न्यायपालिका, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), चुनाव आयोग आदि) के बीच कई शक्तियों संतुलन को बदल दिया था।

    और पढ़ें
  • भारत के साथ सोमनाथ मंदिर को बनाए रखने में आर्थिक बहिष्कार की भूमिका : जूनागढ़ की 5 अनमोल धरोहरों की कहानी

    भारत के साथ सोमनाथ मंदिर को बनाए रखने में आर्थिक बहिष्कार की भूमिका : जूनागढ़ की 5 अनमोल धरोहरों की कहानी

    क्या आप जानते हैं? अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, जूनागढ़ में स्थित सोमनाथ मंदिर लगभग 85 दिनों तक भारतीय नियंत्रण से बाहर रहा, क्योंकि जूनागढ़ के नवाब ने पाकिस्तान के साथ शामिल होने की घोषणा की थी। अंततः, जूनागढ़ को भारत में एकीकृत करने में एक शक्तिशाली आर्थिक बहिष्कार और एक शानदार जनमत संग्रह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें लगभग 90% हिंदुओं ने भारत के साथ रहने का विकल्प चुना। जहां  ऑपरेशन पोलो ने ‘अंतरराष्ट्रीय हथियार बहिष्कार’ के माध्यम से हैदराबाद राज्य को भारत के साथ लाने में मदद की,वहीं  जूनागढ़ के नवाब को आर्थिक बहिष्कार के सामने हार माननी पड़ी।

    फोटो स्रोत : youngisthan website

    और पढ़ें
  • जब रमन ने 1930 में नोबेल भोज में ध्वजविहीन भारत का प्रतिनिधित्व किया

    जब रमन ने 1930 में नोबेल भोज में ध्वजविहीन भारत का प्रतिनिधित्व किया

    कई पुरस्कार समारोहों में, पुरस्कार विजेता देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराना एक आम परंपरा है। अब कल्पना कीजिए कि भारत रत्न सी.वी. रमन को कैसा लगा होगा जब 1930 में नोबेल पुरस्कार जीतने के बाद आयोजित नोबेल भोज में उन्हें ब्रिटिश यूनियन जैक के नीचे बैठना पड़ा था, जो उस समय भारत के औपनिवेशिक संघर्ष का प्रतीक था।

    और पढ़ें
  • दूध से मीडिया तक: अमूल, साराभाई और खेड़ा की कहानी : भारत का पहला ग्रामीण टीवी प्रोजेक्ट

    दूध से मीडिया तक: अमूल, साराभाई और खेड़ा की कहानी : भारत का पहला ग्रामीण टीवी प्रोजेक्ट

    इस विश्व टेलीविजन दिवस पर, भारतीय मीडिया इतिहास के एक उल्लेखनीय अध्याय पर पुनर्विचार करना उचित और प्रासंगिक होगा। यह अद्भुत कहानी खेड़ा संचार परियोजना (केसीपी) के माध्यम से गुजरात, अमूल, विक्रम साराभाई और यहां तक कि चेन्नई को भी जोड़ती है। 1970 के दशक के मध्य में शुरू किया गया, ग्रामीण विकास के लिए टेलीविजन के उपयोग का यह भारत में पहला गंभीर प्रयास था।

    और पढ़ें
  • 2,525 किमी यात्रा, 5 राज्य, 40 करोड़ लोगों की जीवनरेखा राष्ट्रीय नदी गंगा; जानिए इसके ‘स्व-शुद्धिकरण’ का वैज्ञानिक रहस्य

    2,525 किमी यात्रा, 5 राज्य, 40 करोड़ लोगों की जीवनरेखा राष्ट्रीय नदी गंगा; जानिए इसके ‘स्व-शुद्धिकरण’ का वैज्ञानिक रहस्य

    गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी है, जो गोमुख से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक लगभग 2,525 किमी बहती है। यह पांच राज्यों से गुजरते हुए 40 करोड़ लोगों को जीवन, जल और आजीविका देती है। गंगाजल में मौजूद बैक्टीरियोफेज इसे प्राकृतिक रूप से शुद्ध रखते हैं, इसलिए इसे ‘मां गंगा’ कहा जाता है। 4 नवंबर 2008 को इसे राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया। 2025 में महाकुंभ के दौरान गंगा प्रदूषण पर कई भ्रामक रिपोर्टें सामने आईं, जबकि वैज्ञानिक अध्ययन इसके जल की विशिष्ट शुद्धता की पुष्टि करते हैं।

    और पढ़ें
  • पांचवीं शताब्दी के कालिदास के मेघदूत के दिशा ज्ञान के सामने आधुनिक GPS फेल

    पांचवीं शताब्दी के कालिदास के मेघदूत के दिशा ज्ञान के सामने आधुनिक GPS फेल

    हर साल नवंबर में, कालिदास महोत्सव महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र को एक जीवंत मंच में बदल देता है, जहां चौथी-पांचवीं शताब्दी में चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान हुए कवि कालिदास का उत्सव मनाया जाता है। रामटेक में दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत और नाटक के माध्यम से कालिदास की आत्मा को जीवंत करता है, यह कार्यक्रम कला के ऐसे रूप को सामने लाता है, जो कालिदास की कालातीत रचनाओं की काव्यात्मक सुंदरता को प्रस्तुत करता है।

    इस महीने रामगिरि (आधुनिक रामटेक) में कालिदास महोत्सव मनाते हुए, मेघदूत को फिर से पढ़ने का यह एक आदर्श अवसर है, एक ऐसी कविता, जो न केवल हृदय की लालसा को दर्शाती है, बल्कि भारत के भूगोल का विस्तृत विवरण भी देती है।

    और पढ़ें
  • भारत का पहला आम चुनाव: 12 पॉइंट्स में समझें भारत ने कैसे रचा विश्व का सबसे बड़ा चुनावी इतिहास

    भारत का पहला आम चुनाव: 12 पॉइंट्स में समझें भारत ने कैसे रचा विश्व का सबसे बड़ा चुनावी इतिहास

    किसी भी राष्ट्र की शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक प्रणाली की आवश्यकता होती है। दुनियाभर के देशों में विभिन्न प्रकार की शासन प्रणालियां लागू हैं, लेकिन इन सभी में जो सर्वोत्तम प्रणाली है, वह है लोकतंत्र। जी हां, लोकतंत्र… जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा किया जाने वाला शासन। यही वह शासन प्रणाली है जिसमें शक्ति जनता जनार्दन में निहित होती है। अगर बात भारत की करें, तो 99.1 करोड़ (करीब 100 करोड़) मतदाताओं के साथ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में इसे पहचान मिली है। लेकिन क्या आप जानते हैं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की शुरूआत कैसे हुई? पहला आम चुनाव कब और कैसे आयोजित हुआ? भारत का पहला वोट किसने डाला? और किन चुनौतियों का सामना करते हुए लोकतंत्र की यह ऐतिहासिक यात्रा शुरू हुई? चलिए ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानते हैं।

    और पढ़ें