‘महिलाओं की हत्या नहीं’ : चार्ली हेब्दो हमले में कुरान, हिजाब और धर्मांतरण की मांग : एक जिंदा बची महिला की कहानी

चार्ली हेब्दो

एक फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजीन चार्ली हेब्दो द्वारा बार-बार छापे गए ‘पैगंबर मुहम्मद’ के एक व्यंग्य कार्टून से नाराज होकर कौआची भाइयों ने 7 जनवरी, 2015 को पेरिस में उसके ऑफिस पर हमला किया। इस हमले में 10 मिनट से भी कम समय में 12 लोग मारे गए। दुनिया ने फ्रांस में जन्मे दो अल्जीरियाई मुस्लिम भाइयों, सईद कौआची और चेरिफ कौआची द्वारा किए गए एक भयानक आतंकवादी गोलीबारी हमले को देखा।


हमले के बाद व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो के ऑफिस के अंदर का नजारा। इमेज सोर्स : NBC न्यूज़

सुबह 11:30 बजे, अल्जीरियाई मूल के दो फ्रांसीसी कौआची भाई, असॉल्ट राइफलों से लैस होकर व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो  के पेरिस स्थित ऑफिस में घुसे और सबसे पहले वहां के केयरटेकर फ्रेडरिक बोइसो को मार डाला। फिर उन्होंने कार्टूनिस्ट कोरीन ‘कोको’ रे को दूसरे फ्लोर पर एडिटोरियल मीटिंग का दरवाजा खोलने के लिए मजबूर किया, फिर पुलिस ऑफिसर फ्रैंक ब्रिनसोलारो और गार्डिंग एडिटर स्टीफन ‘चार्ब’ चारबोनियर को गोली मार दी।

बंदूकधारियों ने चारबोनियर, कार्टूनिस्ट काबु, वोलिंस्की, टिग्नस और होनोरे, साथ ही कॉलमनिस्ट बर्नार्ड मैरिस, मनोविश्लेषक एल्सा कायात, कॉपी एडिटर मुस्तफा औराद और मेहमान मिशेल रेनॉड का नाम लेकर उन्हें मार डाला। वे पुलिस की गोलीबारी के बीच वहां से भागे, पर बाद में ऑफिसर अहमद मेराबेट को मार डाला, जो उनका 12वां शिकार था।



चार्ली हेब्दो आतंकी हमले के हमलावर, शेरिफ कोआची और सईद कोआची  इमेज सोर्स: Long War Journal

सिगोलिन विंसन और कोरीन ‘कोको’ रे PTSD (Post-Traumatic Stress Disorder), अपराधबोध और बुरे सपनों से जूझ रही हैं, नरसंहार के दौरान स्वयं को बचाने के लिए छिपने की घटना उन्हें आज भी परेशान करती है। ये कहानियां बताती हैं कि बंदूकें शांत होने के बाद भी आतंक की पकड़ कितने लंबे समय तक बनी रहती है। हम आपके लिए सिगोलिन विंसन की कहानी लाए हैं, जो इस हमले में बच गईं। उनकी कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें छोड़ दिया गया था और उन्हें धर्म बदलने और कुरान पढ़ने के लिए कहा गया था।

सिगोलिन विंसन : डिकेड ऑफ शैडोज 

सिगोलिन विंसन, चार्ली हेब्दो की समर्पित क्राइम रिपोर्टर और न्यायिक इतिहासकार, 7 जनवरी, 2015 को दूसरी मंजिल पर संपादकीय बैठक में बैठी थीं, जब कौआची भाइयों ने कार्टूनिस्ट कोरीन ‘कोको’ रे से दरवाज़ा खुलवाकर अंदर धावा बोल दिया था। विंसन पहले श्रम वकील थीं, जो 2012 में व्यंग्यात्मक अंदाज में अदालती मामलों को कवर करने के लिए मैगजीन में शामिल हुई थीं। कौआची भाइयों ने घुसते ही तुरंत गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें सिगोलिन विंसन के आसपास के ज्यादातर लोग गोलियों की बौछार में मारे गए।

जान बचाने की बेताब कोशिश

विंसन छिपने के लिए एक पतले रास्ते से फर्श पर रेंगती हुई आगे बढ़ीं,  लेकिन चेरिफ कौआची ने उन्हें देख लिया, उसे हाथ से पकड़ा और अपनी AK-47 उनके सिर पर तान दी। बारूद के धुएं और चीखों के बीच, उन्होंने अपनी जान की भीख मांगी, उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे, जबकि वोलिंस्की और काबु जैसे उसके साथी पास ही गिर गए थे।

कौआची ने अपना हथियार नीचे करते हुए कहा, “मैं तुम्हें इसलिए नहीं मार रहा क्योंकि तुम एक औरत हो, हम औरतों को नहीं मारते।” इसके बाद कौआची ने उनसे इस्लाम अपनाने, कुरान पढ़ने, हिजाब पहनने और अल्लाह की बड़ाई करने को कहा। फिर ‘अल्लाहु अकबर!’ चिल्लाते हुए वह मुड़ा और सिगोलिन विंसन को मरे हुए लोगों के बीच जिंदा छोड़ गया। 

विंसन वहीं गिर गईं, मरने का नाटक करने लगीं, उनके चारों ओर खून फैल गया था, उनका दिल जोरों से धड़क रहा था, जबकि बंदूकधारी एक-एक करके सभी मंजिलों पर अपना कहर बरपा रहे थे। 

बाद में सिगोलिन विंसन लाशों के ऊपर से चलकर फायर ब्रिगेड को फोन करने गईं। उनसे घबराहट के कारण बोला नहीं जा रहा था। सदमे में भरकर वह फुसफुसाते हुए इतना ही बोल पाईं, “वे सब मर गए हैं।” इस भयानक मंजर के सामने उसे अपना काम बहुत छोटा लग रहा था।

पत्रकार सिगोलीन विंसन, चार्ली हेब्दो की समर्पित क्राइम रिपोर्टर और न्यायिक इतिहासकार।  इमेज सोर्स: : Le Journal du Dimanche

एक दशक बाद भी सिगोलिन विंसन को बच जाने का अपराध बोध सताता है, वह सोचती हैं कि आखिर उन्हें क्यों बख्श दिया गया? हमले के बाद वह स्वयं को एक ‘जॉम्बी’ बताती हैं, सुन्न, मशीनी, बुरे सपनों से परेशान। 2025 के इंटरव्यू में, वह साइमन फिएस्की जैसे पीड़ितों को सम्मान देती हैं, कोर्ट में मास्टरमाइंड पीटर चेरिफ का सामना करती हैं, और ट्रॉमा के बावजूद अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करती है।

कट्टरपंथी आतंकवाद समाज पर गहरे घाव छोड़ जाता है, व्यक्तिगत विश्वासों को जानलेवा सार्वजनिक हमलों में बदल देता है। कौआची भाइयों, जो जिहादी समूहों द्वारा कट्टरपंथी बनाए गए थे और अल-कायदा से जुड़े थे, ने आजाद भाषण और व्यंग्य के खिलाफ हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया। उन्होंने विंसन को तभी बख्शा, जब उन्होंने उनसे धर्म बदलने की मांग की, जो उग्रवाद के कठोर नियम को दिखाता है कि ‘हम तुम्हें इसलिए बख्श रहे हैं ताकि तुम कुरान पढ़ सको।’