एक दौर था जब अमेरिकी सीनेट हॉल में हिंदू शास्त्रों का पाठ होते ही ईसाई कट्टरपंथी इसे “अभिशाप” बताते हुए चिल्ला उठे थे। उन्होंने इसे जीसस का अपमान बताया था। लेकिन उसी अमेरिका में आज हिंदू धर्म ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता पर जनप्रतिनिधि पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे हैं। इस लेख में हम आपको चरणबद्ध तरीके से बताएंगे कि कैसे 2007 में ईसाई मिशनरियों ने सीनेट में हिंदू प्रार्थना होने पर हंगामा किया था।

विरोध 12 जुलाई 2007 को तब हुआ था, जब नेवाडा के डेमोक्रेट सीनेट बहुमत नेता हैरी रीड ने हिंदू पुजारी राजन जेड को अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य सीनेट में प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया था। अमेरिका में यह पहली था, जब किसी सीनेट में आधिकारिक रूप से हिंदू प्रार्थना करने के लिए किसी पुजारी को बुलाया गया हो। लेकिन जैसे ही माथे पर तिलक और भगवा वस्त्र पहने पुजारी राजन जेड ने गायत्री मंत्र का वाचन शुरू किया, वैसे ही सीनेट की गैलरी में बैठीं दो महिलाएं और एक पुरुष ने चिल्लाना शुरूकर दिया। वह कह रहे थे ‘ईसा मसीह के अलावा कोई भी भगवान नहीं है।’
विरोध करने वालों में डेविड मरे, उनकी पत्नी क्रिस्टन और लॉरा बीबाउट शामिल थीं। तीनों ने इसे अभिशाप बताते हुए और हाथ में बाइबिल लेकर भी लहराया। जिसके बाद कैपिटल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह घटना रिलीजियस फ्रीडम/धार्मिक सहिष्णुता पर ज्ञान देने वाले अमेरिका के लिए एक काले अध्याय की तरह थी। 2 मिनट में घटित हुए इस घटनाक्रम के दृश्य कैमरों में कैद हो गए, जबकि कई मीडिया संस्थानों ने इसे लाइव भी चलाया था।
हालांकि, विरोध करने वालों की गिरफ्तारी के बाद भी प्रदर्शन का दौर नहीं थमा। जून 2007 में इसको लेकर अमेरिका में संगठित विरोध प्रदर्शन हुए। मिशनरियों ने इसे अमेरिका में ईसाई विरासत पर हमला बताया। अमेरिकी फैमिली एसोसिएशन नामक संस्था से जुड़े करीब 22 लाख लोगों ने सीनेटरों को ईमेल करके विरोध जताने की मुहिम चलाई और हिंदू प्रार्थना को घिनौनी मूर्ति बताया।
संस्था के चेयरमैन टिम वाइल्डमॉन ने रीड कार्यालय पर यह कहते हुए दबाव डाला की यह ईसाईयों का नैतिक पतन है। साथ ही संस्था से जुड़े लोगों ने विरोध में 143,000 याचिकाएं सीनेटरों को भेजी थीं। अमेरिकी फैमिली एसोसिएश संस्था के अलावा सीनेट में हिंदू प्रार्थना का विरोध करने वालों में अमेरिका के कई प्रतिष्ठित व्यक्ति भी शामिल थे। जिसमें अमेरिकी नौसेना के पूर्व पादरी गॉर्डन क्लिंगेनश्मिट भी शामिल थे। उन्होंने 10 जुलाई, 2007 को सीनेट के कार्यालयों में जाकर हिंदू प्रार्थना का विरोध किया था। जिसके चलते उनका कोर्ट मार्शल भी हुआ था।
हालांकि, इस घटना के सिर्फ 6 वर्षों बाद ही अमेरिका के लोगों को यह पता चल गया कि सिर्फ सनातन धर्म ही है जो सबको जोड़ने और विश्व शांति की कामना करता है। जिस श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का पाठ करने पर विरोध हुआ था, उसी गीता को हाथ में लेकर अमेरिकी संसद में शपथ लेने की परंपरा प्रारंभ हुई। जनवरी 2013 में पहली बार हिंदू महिला तुलसी गबार्ड 32 वर्ष की आयु में अमेरिकी संसद की सदस्य बनीं। उन्होंने संसद में गीता पर हाथ रखकर पद और गोपनीयता की शपथ ली। तुलसी ने अपनी इस शपथ को गीता के निष्काम कर्म से जोड़कर देखा।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष रहे जॉन बोहेनर तुलसी गबार्ड को भगवद् गीता पर हाथ रखकर पद की शपथ दिलाते हुए, इमेज सोर्स- The Hindu
तुलसी गबार्ड के बाद अमेरिका में गीता पर हाथ रखकर शपथ लेने की परंपरा प्रारंभ हुई। उनके बाद 2017 में अमेरिकी सांसद प्रामिला जयपाल (51 वर्ष) और 2019 में राजा कृष्णमूर्ति ने गीता पर हाथ रखकर पद और गोपनीयता की शपथ ली। हाल ही में (2025) में अमेरिकन केंद्रीय चुनाव में सुहास सुब्रमण्यम (42 वर्ष) अमेरिका के पूर्वी तट के पहले भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद बने थे, उन्होंने ने भी 7 जनवरी 2025 को गीता पर हाथ रखकर अपने शपथ ली थी।
2007 में जिस पुजारी जेड के प्रार्थना करने पर विरोध हुआ था, उन्होंन ही जुलाई 2024 में दूसरी बार सीनेट में प्रार्थना की। वहीं, दूसरी अब तक 20 प्रमुख विदेशी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने पद और गोपनीयता की शपथ गीता पर हाथ रखकर ली है। जिसमें अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, त्रिनिदाद और टोबैगो के नेता शामिल हैं।
अमेरिका में गीता पर हाथ रखकर शपथ लेने वालों में FBI के निदेशक काश पटेल, अमेरिका के पूर्वी तट से चुने गए प्रतिनिधि सुहास सुब्रमण्यम, अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड, मैरीलैंड राज्य की उपराज्यपाल अरुणा मिलर, नीदरलैंड में अमेरिकी राजदूत शेफाली राजदान दुग्गल, मेडिकेयर एवं मेडिकेड सेवाओं के केंद्रों की प्रशासक सीमा वर्मा, अमेरिकी सर्जन जनरल विवेक मूर्ति, न्यू जर्सी टाउनशिप से निर्वाचित काउंसिल डॉ. सुधांशु प्रसाद ने गीता पर हाथ रखकर अपने पद और गोपनीयता की शपथ ले चुके हैं।
वहीं, अगर ब्रिटेन की बात करें तो यहां पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ऋषि सुनक, पूर्व कैबिनेट मंत्री आलोक शर्मा, लेबर पार्टी के सांसद कनिष्क नारायण, लीसेस्टर ईस्ट से कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद शिवानी राजा ने गीता पर हाथ रखकर पद और गोपनीयता की शपथ ली थी।
इसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया में संसद सदस्य के रूप में वरुण घोष, ऑस्ट्रेलियाई राज्य में कोषाध्यक्ष के रूप में डैनियल मुखी, विधान सभा सदस्य के रूप में दीपक राज गुप्ता ने भी गीता पर हाथ रखकर अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी।
इन देशों के साथ-साथ त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री के रूप में कमला प्रसाद, संसद सदस्य के रूप में डॉ रूडल मूनीलाल और डॉ रिशाद सीचरन, अटॉर्नी जनरल आनंद रामोलगन ने गीता को हाथ में पकड़कर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

